Monday, May 6, 2019

'एजेंसियों को इस बारे में मालूम है'

इरफ़ान मुस्तफ़ा पेशे से शिक्षक हैं और पिछले चार महीने से पंजाब के विभिन्न इलाक़ों में क़रीब 10 शादियां करा चुके हैं. बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया, "हमने हर एक शादी बहुत देखभाल कर करवाई है. और ये शादियां अदालतों के ज़रिए हुई हैं. जिनमें लड़की और लड़के को पेश किया जाता है."
इरफ़ान ने चीनी लड़कों से शादी करवाने के बाद चीन में लड़कियों से देह व्यापार की ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि 'ये मीडिया की फैलाई हुई बातें हैं और सच्चाई यह नहीं है.'
उनका कहना है कि ऐसा हर शादी में होता है. वह कहते हैं, "कई बार शादी करने के बाद विचार नहीं मिलते जिसकी वजह से मियां-बीवी में विवाद पैदा हो जाता है. इससे ये इनकार नहीं किया जा सकता कि शादी ज़बरदस्ती की गई है."
साथ ही उन्होंने पूछा कि 'क्या ऐसा हो सकता है कि एक मुल्क से दूसरे मुल्क लड़कियों को तस्करी करके ले जाया जा रहा हो और संबंधित एजेंसियों को ख़बर तक न हो? एजेंसियां जानती हैं कि क्या हो रहा है.'
लेकिन हाल ही में लाहौर के विभिन्न इलाक़ों नादिराबाद, बट चौक, डिवाइन रोड से आठ लड़कियों ने थानों में शिकायत दर्ज करवाई थी. इन शिकायतों में से एक शिकायत फ़राह ज़फ़र के नाम से दर्ज है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मां और शादी करवाने वाले संगठन के एक शख़्स ने पैसों के बदले में उनकी ज़बरदस्ती शादी करवाई थी.
इन शिकायतों में लाहौर के कचहरी के इलाक़े से दर्ज एक रिपोर्ट में एक लड़की ने अपने चीनी पति पर हिंसा का आरोप लगाते हुए, कोर्ट में तलाक़ की अपील की है.
कुछ लड़कियों ने दर्ज शिकायत में लिखा कि उनसे कहा गया कि लड़का 'सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) में कर्मचारी है' लेकिन चीन जाने के बाद पता चला कि ऐसा नहीं है. ज़्यादातर मामलों में एक बार जब लड़की पाकिस्तान से चीन रवाना हो जाए तो फिर उससे संबंध रखना नामुमकिन हो जाता है.
एक पुलिस अधिकारी ने अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया है कि उन तमाम मामलों में एक जैसा तरीक़ा इस्तेमाल किया गया है. जिसमें एक महिला, तीन पुरुष किसी ख़ानदान के पास जाते हैं और शादी के ख़र्चे से लेकर चीन जाने तक के सारे इंतज़ाम ख़ुद करवाते हैं.
"कुछ घटनाओं में कहा जा रहा है कि शादियां कामयाब हुई हैं लेकिन ये वह शादियां भी हो सकती हैं जिनमें लड़कियों को सामने आने का मौक़ा नहीं मिला."
पाकिस्तान और चीन की दोस्ती को सीपीईसी से जुड़े हितों के नज़रिये से देखा जाता है. इसीलिए हाल ही में होने वाली घटनाएं और उनके नतीजे में दर्ज होने वाली एफ़आईआर नज़रअंदाज़ हो रही हैं.
इस बारे में बात करते हुए पंजाब असेंबली के सदस्य और मानवाधिकार एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एजाज़ आलम ऑगस्टेन ने बीबीसी को बताया कि 'दो महीने पहले एक चीनी शख़्स को इस्लामाबाद एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया क्योंकि उस पर पाकिस्तानी लड़की को ज़बरदस्ती ले जाने का आरोप था.'
उन्होंने बताया कि पंजाब में पादरी और गिरजाघर शादियां करवा रहे हैं.
"इसी वजह से हमने लाइसेंसिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके नतीजे में गिरजाघर यानी चर्च को भी लाइसेंस लेना होगा और वहां पर दुआ करवाने वाले पादरी को भी. ये नहीं होगा कि जो दुआ करवा रहा है वही निकाह भी पढ़वाएगा. ये करने की एक बड़ी वजह ज़बरदस्ती की शादियों को रोकना है."
इस वक़्त चीन में लैंगिक असंतुलन है. यहां पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज़्यादा है, जिसकी एक बड़ी वजह वहां पर 1979 से 2015 तक रही एक बच्चा पॉलिसी भी है.
शोधकर्ताओं के मुताबिक़. चीन में इस पॉलिसी के बाद ज़्यादातर परिवार लड़कों को तरजीह देते हैं. जिसके नतीजे में ये असंतुलन बढ़ा है और हालात ये हैं कि चीनी पुरुष दूसरे देशों की ओर जा रहे हैं. इससे कई ऐसे गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं जो इस पूरे घटनाक्रम से लाभ उhttps://verlag.baz.ch/artikel/?objectid=03633817-C19C-4AD0-81267398F03C493Eठाते हुए महिलों को चीन में तस्करी करा रहे हैं.

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