Wednesday, October 10, 2018

हम संसद सत्र से भाग नहीं रहे, जल्द तय करेंगे तारीख : गोयल

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता पीयूष गोयल ने आज कहा कि सरकार संसद से भाग नहीं रही है और उसके शीतकालीन सत्र की तिथियों पर शीघ्र ही निर्णय लेगी. गोयल ने कहा कि कई सांसदों ने अनुरोध किया था कि वे हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं. केंद्रीय मंत्री संसद का शीतकालीन सत्र बुलाये जाने में देरी के सवाल का जवाब दे रहे थे.

उन्होंने कहा, मैं नहीं समझता कि ऐसी कोई स्थिति है जहां हमें संसद का सामना करने से भागना पड़े. सरकार संसद की तारीखों पर शीघ्र फैसला करेगी. कांग्रेस ने भाजपा नीत राजग सरकार पर शीतकालीन सत्र में देरी करने को लेकर हमला किया था और कहा था कि केंद्र संसद का सामना करने से बचने के लिए विधानसभा चुनाव को बहाने के रप में इस्तेमाल कर रही है.

वैसे संसद का शीतकालीन सत्र पारंपरिक रूप से नवंबर के तीसरे हफ्ते में बुलाया जाता है. केंद्रीय मंत्रिमंडल में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली राजनीतिक मामलों की समिति संसद के सत्र की तारीखों पर फैसला करती है.

सूत्रों के अनुसार सरकार दिसंबर के दूसरे हफ्ते से करीब 10 दिन का संक्षिप्त शीतकालीन सत्र बुलाये जाने पर विचार कर रही हैं.
आपदा की सूचना पर रिस्पॉन्स टीम तुरंत हो जायेगी सक्रिय
पटना : जिला आपदा प्रबंधन विभाग को हाईटेक करने को लेकर पिछले चार माह से काम चल रहा है. हाईटेक होने के बाद एप की मदद से एक ही क्लिक में आपदा संबंधी जानकारी लोगों को मिल जायेगी. इसमें किसी भी आपदा से लड़ने के लिए एक क्विक रिस्पांस टीम भी बनायी जा रही है, जिसके पास रिसोर्स पर्सन का नाम, एड्रेस, होगा. अगर विशेष तरह की दुर्घटना जैसे केमिकल  दुर्घटना, गैस रिसाव के कारण आग का लगना. ऐसी परिस्थिति में पेट्रोल पंप  डीलर सहित आईओसीएल, एचपीसीएल एवं काॅम्फेड का नाम, पता सभी कुछ रहेगा. आपदा से निबटने के लिए बनी टीम सूचना मिलते ही खुद काम करने लगेगी.
 
अस्पतालों व सरकारी कार्यालयों में भी रहेगा नंबर : आपदा के वक्त हर व्यक्ति आपदा विभाग व जिला आपदा को सूचना दे सके, इसके लिए आपदा से संबंधी नंबरों को सरकारी दफ्तरों में लिखा जायेगा. इसके अलावा अस्पतालों में आपदा का नंबर व सरकारी अस्पतालों में एक ऐसी व्यवस्स्था बनाने को लेकर निर्देश दिया जा रहा है, जिसके बाद आपदा संबंधी चिकित्सक व इमरजेंसी खुद से काम करने लगे और इसके लिए हमेशा मॉक ड्रील किया जाये. 
 रांची. झारखंड हाइकोर्ट में सोमवार को साहेबगंज के राजमहल में डीड राइटरों के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस बीबी मंगलमूर्ति की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को राज्य के डीड राइटरों की जानकारी देने का निर्देश दिया. इस पर राज्य सरकार की अोर से जवाब देने का लिए समय देने का आग्रह किया गया. खंडपीठ ने आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी. उल्लेखनीय है कि राज्य में डीड राइटरों को लाइसेंस देने के लिए उम्मीदवार को परीक्षा में पास करना अनिवार्य है, लेकिन पिछले कई वर्षों से सरकार द्वारा परीक्षा आयोजित नहीं की गयी है.

बिना लाइसेंस के काम करनेवालों को 1996 से डीम्ड https://www.derbund.ch/leben/gesellschaft/Ein-Luxustempel-soll-die-ScientologyKrise-kaschieren/story/22448310लाइसेंस मान लिया गया है. 1996 के बाद डीड राइटर बनने के लिए परीक्षा देने का प्रावधान बनाया गया है.